काव्य

चलो फिर से अजनबी हो जाये

जिंदगी थोड़ी ज्यादा ही मीठी हो गयी है चलो इसे थोड़ी नमकीन बनादे, अनजान फिर से तुम बन जाओ और जान पहचान बढ़ाले कुछ ज्यादा ही हसीन है ये यादे चलो कुछ लम्हों  को अलग हो जाये, तुम अजनबी बन के आओ और हम फिर से मिल जाये खट्टे मीठे से पल जो संग संग… Continue reading चलो फिर से अजनबी हो जाये

Poetry

Lost

More than own life gave importance To what other's would sayLater realizedThinking of others Already lost a lot.Why do we always hurt ourselves To avoid offending those Who were no whereWhen I needed them the most. @Maya