काव्य

रूठना मनाना

मुझे उदास देखकर तुम न उदास हो जाना, मैं रूठ जाऊँ कभी तो न तुम रूठ जाना |

ये रूठना मनाना तो दस्तूर है मोहब्बत का, कहीं इस दस्तूर को न भूल जाना|

कभी जो याद मे हमारी बह जाये बूँद बन के, बहने देना इनको बरस बरस के |

कहीं सूख न जाये ये तरस तरस के ,आंख से वो आंसू न तुम पी जाना |

रस्ते है जुदा तो क्या हुआ ,यूँ ही मिल जायेंगे हम साथ चलते चलते, कहीं घबरा के न साथ छोड़ जाना|

मर जायेंगे हम इंतज़ार करते करते, कर के वादा आने का कहीं न भूल जाना|

@Maya

2 thoughts on “रूठना मनाना

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