काव्य

साहस

बहुत साहस चाहिए होता है, ख़ुदकुशी करने के लिए , बहुत साहस! कितनी बार सोचा होगा, कितनी बार खुद को रोका होगा ! क्यों नहीं कर पाए बात अपनों से, क्यों इतने अकेले हो गए है हम , दौड भाग की जिंदगी में ! क्या इतना जरूरी है आसमान को चुनना, साहस तो चाहिए होता… Continue reading साहस

काव्य

रूठना मनाना

मुझे उदास देखकर तुम न उदास हो जाना, मैं रूठ जाऊँ कभी तो न तुम रूठ जाना | ये रूठना मनाना तो दस्तूर है मोहब्बत का, कहीं इस दस्तूर को न भूल जाना| कभी जो याद मे हमारी बह जाये बूँद बन के, बहने देना इनको बरस बरस के | कहीं सूख न जाये ये… Continue reading रूठना मनाना

काव्य

यादें!

यू ना शर्मा ए जिंदगी मुझसे हमें आज भी तेरा इंतजार है, लौट के आएंगी खुशियां उन राहों पर हमें एतबार है| वादे मोहब्बत के कभी झूठे किए नहीं जाते, लौट के आ वापस तेरे तसव्वुर का दिल आज भी तलब गार है | तुझे पाने के वास्ते हमने किए कितने जतन, रोज आना गली… Continue reading यादें!

काव्य

मुकम्मल इश्क

मुकम्मल इश्क किस्सो और कहानियों का फर्जी हिस्सा है। असल में तो दाल रोटी का सारा किस्सा है। पेट की आग जब भङकती है सरेआम नीलाम होता है बिकता है जिस्म नुमाईशो में जब लालच से नाकाम होता है खाकर ठोकरे जमाने की जब खुद को ठगा पाता है तो ये लफ्ज़ अंधेरे में दफन… Continue reading मुकम्मल इश्क

काव्य · Thoughts

बदलाव

मैं हैरान हूँ रोज़ रंग बदलती दुनिया को देख कर, पर बदलाव ही तो प्रकृति का नियम है, इसमें कुछ नया नहीं है ,फिर भी ये चुबता सा क्यूँ है !! ऐसा नही है,कि मैं तटस्थ हूँ अपनी सोच मे, मैं भी बदलाव पसंद हूँ , कुछ नया सीखने के लिए, मैं भी बदली हूँ… Continue reading बदलाव

काव्य

चलो फिर से अजनबी हो जाये

जिंदगी थोड़ी ज्यादा ही मीठी हो गयी है चलो इसे थोड़ी नमकीन बनादे, अनजान फिर से तुम बन जाओ और जान पहचान बढ़ाले कुछ ज्यादा ही हसीन है ये यादे चलो कुछ लम्हों  को अलग हो जाये, तुम अजनबी बन के आओ और हम फिर से मिल जाये खट्टे मीठे से पल जो संग संग… Continue reading चलो फिर से अजनबी हो जाये

काव्य

इलज़ाम-ऐ-इश्क़

मैंने माना हक़ीक़त में तुम नहीं शामिलपर मेरे सपनो मैं तेरा आना जाना है मानो या न मनो तुम को भी है हमसेइत्तफ़ाक़ ये बड़ा पुराना है रूह तक जो आती है ऐसे महक हो तुम तुम्हारे लबो पे हो या नमेरी साँसों में नाम तुम्हरा है हर आह पे तेरी याद आये इस तरह… Continue reading इलज़ाम-ऐ-इश्क़

काव्य

ढाई आखर प्रेम के, पढ़े तो पंडित हो जाये..

कितनी सुनी-अनसुनी कहानियाँ,मिलना -बिछड़ना रूठना -मनानाफिर सर रख के माँ के कंधो पे सो जाना ,कुछ अंजानी और कुछ जानी पहचानीप्रेम कहानियां कुछ कहावते , कुछ किस्से'ढाई आखर प्रेम के पढ़े तो पंडित हो जाये 'पर फिर भी हम कुछ समझ नहीं पाए ऐसे ही कुछ सकुचाये और शर्माए ,हम अपने पिया के घर आये… Continue reading ढाई आखर प्रेम के, पढ़े तो पंडित हो जाये..

काव्य

आज का दौर ..

नयी नयी सी है हवा ,नया नया है ये शौंक फूलो की जगहअब जुबान से झड़ती है गालियां !तुझ से जयादा हूँ मैं काबिल ,आती है मुझे बेहिसाब गालिया ! कभी शर्मा हया से झुकती थी जो आंखे ,आज उठ कर बेशरम सी हो गयी !सलीको से जो उठाते थे कदमअब नशो में झूमते है… Continue reading आज का दौर ..

काव्य

मेरी बेबाक़ी

कभी कभी मेरी बेबाक़ी, मेरी मुश्किल का सबब हो जाती है! लोग समझते है कुछ और ,मुझे कहना कुछ और होता है!मैंने बहुत पहले ही सीख लिया ना कहना, अब हाँ कहना मुश्किल है, आ गया अब खुद के लिए जीना लौटना अब इन राहों से मुश्किल है! ऐसे ही हूँ मैं ऐसा ही है… Continue reading मेरी बेबाक़ी